跳到主要内容आज ही के दिन इतिहास ने करवट ली थी….
डॉ. बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर ने तलवारों की चमक और बंदूकों की गड़गड़ाहट के सामने अपनी कलम को खड़ा कर दिया था।
और उसी कलम की ताक़त से उन्होंने वंचितों–शोषितों के ऊपर 6 हज़ार साल से जकड़ी उन अमानवीय जातिगत बेड़ियों को तोड़कर फेंक दिया था।