跳到主要内容जब लड़कियों का स्कूल जाना अपराध माना जाता था,
जब किताब उठाना बग़ावत कहलाता था,
तब एक स्त्री थी…
जो पत्थरों, गालियों और तिरस्कार के बीच
ज्ञान की ज्योति लेकर निकली।
वो सिर्फ़ शिक्षिका नहीं थीं,
वो सोच बदलने वाली क्रांति थीं।
वो सावित्रीबाई फुले थीं।
आज अगर बेटियाँ पढ़ रही हैं,