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25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला अध्याय है, जब सत्ता के अहंकार ने संविधान की आत्मा को कुचलने का प्रयास किया।
आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का हनन हुआ, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया गया, प्रेस की आवाज दबाई गई और हजारों लोकतंत्र सेनानियों को जेलों में डाल