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श्रद्धेय स्वामी विवेकानंद जी ने अपने जीवनकाल में माँ भारती, सनातन और भारतीय संस्कृति के वैभव को अपने प्रयासों से पुनर्स्थापित किया। उन्होंने धार्मिक चेतना को जागृत करने, सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव की भावना उत्पन्न करने के साथ-साथ युवाशक्ति को राष्ट्रनिर्माण की नींव के रूप