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कल तक कुछ लोग सोशल मीडिया पर “जैसी करनी, वैसी भरनी” की नसीहत दे रहे थे। आज वक्त ने ऐसा पलटा खाया कि वही लोग खुद जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। उनके चेहरे की रौनक गायब है और हाल ऐसा है कि चेहरा लंगूर जैसा उतर गया है। सच यही है—समय सबसे बड़ा न्यायाधीश होता है, और कर्म का हिसाब