और ये “पत्रकार” हैं!
अमित शाह जी के सामने हाँथ बाँधे ठिठियाते हैं! शाह ने इनकी तरफ़ एक नज़र देख भी लिया तो फूले नहीं समाते! और इनको क्रिसमस विशिंग से आपत्ति है!
सोचिए, लोकतंत्र का कितना नुक़सान ऐसे “पत्रकारों” ने किया है जो सत्ता की ताल पर हर पल नाचने को तैयार बैठे है!