राजनीति में आमतौर पर नेता जनता को एक वोटर की तरह देखता है। चुनाव के वक्त उसकी बड़ी अहमियत होती है, लेकिन चुनाव बीतते ही वही आदमी भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाता है। अक्सर राजनीति में पहचान और सम्मान उसी को मिलता है, जिसके पास ताक़त होती है। लेकिन समाजवादी राजनीति की विरासत इससे

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  1. #1

    रामपुर जेल से रिहा होते ही दरवाज़े पर मौजूद ED ने आज़म ख़ान साहब को गिरफ़्तार कर लिया। उनका दर्द फूटा - “मुसलमान होने की सज़ा है।” ऐसा सलूक सत्ता की बहादुरी नहीं, सियासी कायरता है…

  2. #2

    हज़ारों लोग सड़कों पर हैं, लेकिन प्रधानमंत्री की प्राथमिकताओं से मणिपुर ग़ायब है। मोदी जी, मणिपुर भी भारत है। वहाँ के नागरिकों की ज़िंदगी चुनावी रैलियों से ज़्यादा क़ीमती है। क्या…

  3. #3

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ जनता की मॉक संसद में विपक्ष ने छह गंभीर आरोप लगाए हैं! चुनाव चोरी की साज़िश, 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने, संसद की मंज़ूरी के बिना…

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ जनता की मॉक संसद में विपक्ष ने छह ग…
  4. #4

    भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी ख़ूबसूरती यही है कि संविधान ने पहले दिन से हर नागरिक को बराबर वोट का अधिकार दिया। महिला हो, दलित हो, पिछड़ा हो या ग़रीब, सबके वोट की क़ीमत बराबर रखी…

  5. #5

    सरदार वल्लभभाई पटेल सिर्फ़ भारत की एकता के शिल्पी नहीं थे, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और राष्ट्रीय एकजुटता के मज़बूत पैरोकार भी थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि देश की असली ताक़त…

    सरदार वल्लभभाई पटेल सिर्फ़ भारत की एकता के शिल्पी नहीं थे, बल्कि सामाजिक न्याय,…
  6. #6

    लोकतंत्र में सरकार जनता के द्वारा चुनी जाती है, जनता के ऊपर राज करने के लिए नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेह रहने के लिए। लेकिन जब जनता की चुनी हुई सरकार ही जनता के अधिकारों के ख…

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