राजनीति में आमतौर पर नेता जनता को एक वोटर की तरह देखता है। चुनाव के वक्त उसकी बड़ी अहमियत होती है, लेकिन चुनाव बीतते ही वही आदमी भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाता है। अक्सर राजनीति में पहचान और सम्मान उसी को मिलता है, जिसके पास ताक़त होती है।
लेकिन समाजवादी राजनीति की विरासत इससे